भारतीय समाज पर बढ़ता पाश्चात्य प्रभाव
DOI:
https://doi.org/10.59436/ijpsr.v2i4.08.hin.3139-342XKeywords:
भारतीय समाजए पाश्चात्य प्रभावए पश्चिमीकरणए वैश्वीकरणए आधुनिकीकरणए भारतीय संस्कृतिए सामाजिक परिवर्तनए सांस्कृतिक परिवर्तनए युवा संस्कृतिए उपभोक्तावादए व्यक्तिवादए पारिवारिक संरचनाए जीवन.शैलीए परंपरा और आधुनिकता।Abstract
भारतीय समाज अपनी प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओंए विविध सामाजिक संरचनाओंए धार्मिक मान्यताओं और सामुदायिक मूल्यों के लिए विशिष्ट पहचान रखता है। वैश्वीकरणए आधुनिक शिक्षाए औद्योगीकरणए नगरीकरणए सूचना.प्रौद्योगिकी तथा संचार माध्यमों के तीव्र विस्तार के कारण भारतीय समाज पर पाश्चात्य प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है। इस प्रभाव ने भारतीय जीवन.शैलीए पहनावेए खान.पानए भाषाए शिक्षाए पारिवारिक संरचनाए विवाह संबंधोंए युवा संस्कृति और सामाजिक मूल्यों में महत्वपूर्ण परिवर्तन उत्पन्न किए हैं। पाश्चात्य प्रभाव के परिणामस्वरूप व्यक्तिवादए व्यक्तिगत स्वतंत्रताए लैंगिक समानताए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक जीवन.मूल्यों को प्रोत्साहन मिला हैए वहीं उपभोक्तावादए भौतिकवादए पारंपरिक मूल्यों में कमी तथा पारिवारिक एवं सामुदायिक संबंधों में परिवर्तन जैसी चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। भारतीय समाज ने इन प्रभावों को पूर्णतः स्वीकार करने के बजाय अनेक स्तरों पर उनका स्थानीय संस्कृति के साथ समन्वय किया है। अतः पाश्चात्य प्रभाव को केवल सांस्कृतिक परिवर्तन के रूप में नहींए बल्कि भारतीय परंपरा और आधुनिकता के बीच निरंतर संवाद एवं पुनर्संरचना की प्रक्रिया के रूप में समझना आवश्यक है। प्रस्तुत अध्ययन भारतीय समाज पर बढ़ते पाश्चात्य प्रभाव के सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्षों तथा इसके सामाजिक.सांस्कृतिक परिणामों का विश्लेषण करता है।
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